Home Loan लेते वक्त इन बातों का रखेंगे ध्यान, तो कभी नहीं होंगे परेशान


अपना घर खरीदने का सपना हर भारतीय देखता है। हर कोई सस्ता और अच्छा घर लेना चाहता है। अगर आप भी अपना घर खरीदने की योजना बना रहे हैं और इसके लिए लोन लेने का विचार कर रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हम आपको होम लोन से जुड़ी ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जो आपके लिए बेहद लाभदायक साबित हो सकती हैं।
आमतौर पर होम लोन के रूप में घर की कीमत का 75 से 90 फीसदी हिस्सा ही कर्ज के रूप में दिया जाता है। इसलिए ग्राहकों को घर की कीमत की कम से कम 10 से 25 फीसदी राशि की की व्यवस्था करनी पड़ती है। डाउन पेमेंट इकट्ठा करने में आपको काफी मुश्किल हो सकता है। इसलिए जानते हैं कुछ ऐसे तरीके, जिनके माध्यम से आपको डाउन पेमेंट जुटाने में परेशानी नहीं होगी।
डाउन पेमेंट के लिए आपको जल्द से जल्द सही योजना बनानी होगी। बिना फाइनेंशल प्लानिंग के आपको यह रकम जुटाने में दिक्कत हो सकती है। अगर आप समय पर इसकी योजना बनाते हैं, तो आपको चक्रवृद्धि की शक्ति का फायदा मिल सकता है। इसके लिए आपको सबसे पहले यह अंदाजा लगाना होगा कि पेमेंट डाउन पेमेंट के लिए आपको कितनी रकम चाहिए होगी। निवेश के माध्यम से अगर यह रकम जुटाई जाए, तो यह आपके लिए फायदेमंद होगा। इसलिए आवश्यकता अनुसार, जोखिम लेने की क्षमता और निवेश अवधि पर फैसला लें।
इसके लिए आप जितनी अधिक राशि का भुगतान अपनी जेब से करेंगे, आपको उतना ही कम कर्ज लेना पड़ेगा और इस पर लागू ब्याज भी कम रहेगा। इसलिए डाउन पेमेंट के लिए लोन लेने से बचें। लेकिन यह रकम जुटाने के लिए अपनी आर्थिक क्षमता से बाहर न जाएं ताकि आपके लिए अन्य लक्ष्यों को पूरा करना आसान हो। बता दें कि होम लोन का एलटीवी रेश्यो कम होने से आपको कर्ज को मंजूरी मिलने की संभावना भी बढ़ जाएगी।
डाउन पेमें के लिए पर्सनल लोन या गोल्ड लोन ग्राहकों को आसान विकल्प लगते हैं, लेकिन इनके भी अपने नुकसान हो सकते हैं। ऋणदाता कंपनियां ज्यादातर ऐसे ग्राहकों को महत्व देती हैं, जिनका फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेश्यो (FOIR) 50 से 60 फीसदी तक सीमित रहे। आपके पर्सनल लोन या गोल्ड लोन की ईएमआई को होम लोन की ईएमआई से जोड़ने पर आपका FOIR तय सीमा को पार जा सकता है। ऐसी स्थिति में होम लोन आवेदन खारिज किया जा सकता है।
होम लोन चुकाने में ग्राहकों को लंब समय लग जाता है। अक्सर लोन चुकाने के लिए ग्राहकों को 20 से 30 साल भी लग जाते हैं। ऐसे में अतिरिक्त ऋण की जिम्मेदारी उठाना आपकी आर्थिक हालत को तंग बना सकता है। अगर आपको भविष्य में किसी मेडिकल इमरजेंसी हो और उसके लिए आप कर्ज लेना चाहेंगे, तो आपको मुश्किल हो सकती है। जब कर्जदाता कंपनी के पास अपना कर्ज आवेदन जमा करते हैं, तो यह कंपनी क्रेडिट ब्यूरो से आपकी क्रेडिट रिपोर्ट मांगती है। ऐसे आग्रह मिलने पर क्रेडिट ब्यूरो आपके क्रेडिट स्कोर को कुछ अंक घटा देते हैं।

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