UPI से हर रोज हो रही है करोड़ों की ठगी, जानिए ऑनलाइन जालसाज कैसे बचें


ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जमाने में यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) ने खासी लोकप्रियता हासिल कर ली है। तेजी से पैसे ट्रांसफर करने के लिए यूजर्स इस वक्त नेट बैंकिंग से ज्यादा पेटीएम, भीम और गूगल-पे जैसी एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
हालांकि, इन ऐप्स के इस्तेमाल के साथ ही यूपीआई से जुड़े साइबर क्राइम के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। पेटीएम ने तो अपने ग्राहकों को चेतावनी भी जारी की है कि वे फर्जी केवाआईसी कॉल्स में अपनी जानकारी न दें। इसके अलावा गूगल-पे सेवा ने भी लोगों को अपना यूपीआई पिन गुप्त रखने की सलाह दी है। इसके अलावा सिर्फ ट्रस्टेड ऐप्स को ही मोबाइल पर रखने के लिए कहा गया है। दिल्ली पुलिस ने ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें ग्राहकों को ई-वॉलेट को सुरक्षित रखने की तरकीबें बताई गई हैं।


1. निजी जानकारी साझा न करें

पुलिस के मुताबिक, किसी भी कॉल पर अपनी निजी जानकारी शेयर न करें। आज कल जालसाज कॉल-मैसेज पर ही केवाईसी वेरीफिकेशन करने के लिए कहते हैं और यूजर की अहम जानकारी हासिल कर लेते हैं। जबकि असल में कोई भी कंपनी ऐसा नहीं कर सकती

2. अनजान लिंक्स पर जानें से बचें

ऑनलाइन ठगी में माहिर यूजर्स को एसएमएस और ईमेल के जरिए कुछ लिंक भेजते हैं। इन लिंक्स के जरिए यूजर्स दूसरी अनसेफ वेबसाइट पर डायरेक्ट हो जाता है, जहां हैकर्स के लिए आपकी जानकारी निकालना आसान होता है।

3. किसी से शेयर न करें यूपीआई पिन

जालसाज कई बार आपके अकाउंट में पैसे डालने के नाम पर यूपीआई सर्विस (भीम, पेटीएम, गूगल पे) का पिन मांग लेते हैं। ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर वे अनजान नंबर से ट्रांजेक्शन रिक्वेस्ट भेजते हैं। इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि कभी भी पैसे रिसीव करने पर आपको अपना पिन नहीं डालना होता है। सिर्फ किसी को पैसे भेजते वक्त ही आपका पिन डालना जरूरी होता है। ऐसे में किसी अनजान नंबर से रिक्वेस्ट आने पर आप उसकी रिक्वेस्ट ब्लॉक कर सकते है। गूगल पे में आपको जालसाज नंबरों की वॉर्निंग भी दी जाती है।


4. सोशल मीडिया पर न डालें निजी जानकारी

धीमे इंटरनेट या खराब कनेक्टिविटी के कारण शॉपिंग में ट्रांजेक्शन फेल होने के बाद कई बार कस्टमर्स सोशल मीडिया पर अपनी कंप्लेन के साथ ट्रांजेक्शन नंबर और फेल ट्रांजेक्शन का स्क्रीनशॉट पोस्ट कर देते हैं। ऐसे कई मौके आए हैं, जब सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई इसी जानकारी को इस्तेमाल कर के जालसाजों ने यूजर्स से संपर्क किया और उनसे कंपनी का प्रतिनिधि बन कर बात की। ऐसे में यूजर्स के लिए जरूरी है कि वे अपने फोन नंबर और ट्रांजेक्शन डीटेल सोशल मीडिया पर न डालें। किसी लेनदेन के नाकाम होने पर यूजर्स को बैंक और ब्रांड की 24*7 हेल्पलाइन पर कॉल करना चाहिए। इसमें कार्ड की डीटेल, सीवीवी और ओटीपी नहीं मांगे जाते।

5. असुरक्षित ऐप डाउनलोड न करें

यूजर्स के लिए जरूरी है कि वे ऐसी कोई भी ऐप डाउनलोड न करें, जिसे गूगल ने वेरिफाई न किया हो। कई बार जालसाज मोबाइल में तकनीकी खामी सुधारने का हवाला देकर मुफ्त स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स (एनीडेस्क, टीम व्यूअर, स्क्रीनशेयर) डाउनलोड करने के लिए कहते हैं, ताकि दूर बैठकर वे आपके मोबाइल की गड़बड़ी सुधार सकें। हालांकि, इन ऐप्स के जरिए वे आपके अकाउंट से बड़ी रकम उड़ा सकते हैं। आरबीआई को पहले भी इन स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स के जरिए यूजर्स के अकाउंट से पैसे निकलने की शिकायतें मिली हैं।

6. मजबूत पासवर्ड-एंटी वायरस से सुरक्षित करें मोबाइल

यूपीआई को सुरक्षित रखने के लिए मोबाइल की सिक्योरिटी को भी मजबूत रखें। सबसे पहले मोबाइल का पैटर्न या पासवर्ड सबसे अलग रखें। पासवर्ड में नंबर, अल्फाबेट और स्पेशल कैरेक्टर जरूर डालें। वहीं, अलग-अलग यूपीआई के अलग पासवर्ड रखना भी जरूरी है। इसके अलावा फोन के सॉफ्टवेयर्स को लगातार अपडेट रखें, ताकि किसी भी तरह की खामी खुद अपडेट हो जाए। यूजर्स चाहें तो एक अच्छी एंटी वायरस ऐप भी अपने मोबाइल में रख सकते हैं।

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