ऐप से लोन लेने से पहले जानें कुछ महत्वपूर्ण जानकारी

केस-1: मिनटों में दूर हुई परेशानी

मोहित एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं। कुछ दिनों पहले उन्हें किसी कारण से पैसों की जरूरत पड़ी। वे पर्सनल लोन लेना चाहते हैं। हालांकि लंबी कागजी प्रक्रिया के बाद भी यह पक्का नहीं था कि उन्हें लोन मिल ही जाएगा। इसके बारे में उन्होंने अपने दोस्त को बताया। दोस्त ने मोहित को कुछ ऐसे ऐप के बारे में बताया जो बिना कागजी कार्रवाई के पर्सनल लोन देती हैं। मोहित ने एक ऐप पर अपनी जानकारी दी और जरूरी डॉक्युमेंट्स अपलोड कर दिए। कुछ ही घंटों में उनके अकाउंट में लोन की रकम आ गई।

केस-2: EMI चूकी तो आए धमकी भरे कॉल

नोएडा में रहने वाले महेश ने ऐप के जरिए 10 हजार रुपये का पर्सनल लोन लिया था। वह समय पर लोन की EMI चुका रहे थे। एक बार किसी कारण से वह समय पर EMI नहीं दे पाए। इसके बाद उन्हें एक नंबर से लगातार कॉल आने लगे। कॉल करने वाला शख्स महेश के साथ न केवल गाली-गलौच करता बल्कि EMI जमा न करने पर जान से मारने की धमकी भी देता। महेश इससे काफी परेशान हो गए। बाद में उन्होंने धमकी देने वाले शख्स और कंपनी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

आसान भी और मुश्किल भी

ऊपर बताए गए दोनों केस के बाद आप समझ गए होंगे कि ऐप के जरिए पर्सनल लोन लेना आसान तो है ही, साथ ही बाद में समय पर EMI न चुका पाने के कारण परेशानी भी हो सकती है। Finzy, Indiabulls Dhani, Home credit, indian money, Loan adda, Money Tap, kreditbee Apps, CASHe, PayMe, YONO (SBI) आदि ऐसे ऐप हैं जो ऑनलाइन बिना कागजी प्रक्रिया के मिनटों में पर्सनल लोन, कार व बाइक लोन समेत कई प्रकार के लोन दे देते हैं।

कितना मिलता है लोन

ऐप के जरिए एप्लाई करने पर 5 हजार से 15 लाख रुपये तक का पर्सनल लोन मिल जाता है। इसकी सालाना ब्याज दर 12% से 24% तक हो सकती है। यह लोन 5 साल तक के लिए दिया जा सकता है। हालांकि अलग-अलग कंपनियों की लोन देने की लिमिट, ब्याज दर और अवधि अलग-अलग हो सकती है।

ऐप से कैसे मिलता है लोन?

जानकारी मांगना: ऐप कंपनियां लोन के लिए आवदेन करने वाले शख्स से ऑनलाइन ही आधार कार्ड नंबर और PAN जैसी जानकारियां मांगती हैं। इस दौरान ये कंपनियां उस मोबाइल नंबर की मांग करती हैं जो आधार कार्ड से जुड़ा होता है।

योग्यता जांचना: सारी जानकारी लेने के बाद कंपनी ऑनलाइन की योग्यता जांचती है। अगर आवेदन करने वाले शख्स के डॉक्युमेंट्स कंपनी की योग्यताओं के अनुसार सही पाए जाते हैं तो लोन की रकम कुछ की मिनटों में आवेदक के अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाती है।

ये हैं योग्यता के पैमाने

सैलरी, उम्र, क्रेडिट स्कोर, जिस कंपनी में आवेदक जॉब करता है, उसकी कैटेगरी, सोशल मीडिया पर ऐक्टिविटी, एजुकेशन, बैंक अकाउंट के जरिए लेन-देन। आवेदक की योग्यता जांचने के लिए अलग-अलग कंपनियों के अलग-अलग पैमाने हो सकते हैं।

इन डॉक्यूमेंट्स की पड़ती है जरूरत

आधार कार्ड, PAN, मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी, सैलरी स्लिप, बैंक अकाउंट नंबर, बैंक IFSC कोड, छह महीने की बैंक स्टेटमेंट। ये सभी डॉक्यूमेंट्स JPEG या PDF फॉर्मेट में होने चाहिए। लोन देने वाली कंपनियों के अनुसार मांगे गए डॉक्यूमेंट्स कम या ज्यादा हो सकते हैं। यहां ध्यान रहे कि आधार और पैन एक-दूसरे से लिंक्ड होने चाहिए। साथ ही मोबाइल नंबर भी आधार से लिंक हो।

ऐसे कटती है EMI

लोन देते समय कंपनी आवेदक के बैंक अकाउंट को लोन के अकाउंट से जोड़ देती है। इसके लिए कुछ कंपनियों के एजेंट लोन लेने वाले के घर आते हैं और कुछ कागजों पर साइन कराते हैं। इनमें से लोन अग्रीमेंट और बैंक का एक पेपर होता है। इसके बाद एक तय तारीख पर बैंक अकाउंट से लोन की EMI काट ली जाती है।

EMI समय पर न चुकाने पर ये हैं नियम-

लोन देने वाले सभी संस्थानों को रिजर्व बैंक (RBI) की इन गाइडलाइंस का पालन करना जरूरी है। जानें, EMI समय पर न चुका पाने वालों के साथ RBI की गाइडलाइंस के अनुसार कर्ज देने वाले संस्थान क्या कर सकते हैं और क्या नहीं-

क्या नहीं कर सकते, क्या कर सकते हैं

-गाली-गलौच या मारपीट या धमकाना -कर्ज लेने वाले शख्स से कारण पूछें
-किसी भी प्रकार की जोर जबर्दस्ती करना- पेनल्टी लगा सकते हैं। (पेनल्टी की रकम कितनी होगी यह कंपनी पर निर्भर करता है। कुछ कंपनियां 200 रुपये से 1000 रुपये तक की पेनल्टी लगा सकती हैं।)
-एजेंट को घर भेजकर कहासुनी करना-एजेंट को घर भेजकर आराम से कारण पूछ सकते हैं।
-किसी भी प्रकार की संपत्ति जब्त करना-गैर-जमानती वारंट जारी कर सकते हैं।
-रिश्तेदारों या करीबी लोगों को परेशान करना - सिबिल स्कोर में निगेटिव रिपार्ट भेज सकते हैं।

एक बार सिबिल रिपोर्ट खराब हो जाने के बाद भविष्य में कोई लोन, क्रेडिट कार्ड आदि लेने में बड़ी दिक्कत आ सकती है। सिबिल स्कोर 3 अंकों की एक संख्या होती है जो 300 से 900 के बीच होती है। यह आपकी क्रेडिट हिस्ट्री को बताती है। यानी लोन लौटाने की आपकी योग्यता कितनी है। यह स्कोर जितना अधिक होता है क्रेडिट हिस्ट्री उतनी अच्छी मानी जाती है।

ये हैं कर्जदाता के हक

अगर कर्ज देने वाली कंपनी या कंपनी से जुड़े रिकवरी एजेंट किसी भी प्रकार की धमकी देते हैं या गाली-गलौच करते हैं तो कर्ज लेने वाला इन उपायों का इस्तेमाल कर सकता है। धमकी देने, गाली-गलौच करने, मारपीट करने या किसी भी प्रकार से परेशान करने वाले के खिलाफ कर्ज देने वाली कंपनी में शिकायत करें। अगर इससे बाद भी वह शख्स नहीं मानता है या कोई और कॉल करके धमकाता है तो पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं। कंज्यूमर फोरम में भी सबूतों के साथ शिकायत दर्ज करा सकते हैं। कर्ज देने वाली कंपनी के खिलाफ RBI की ऑफिशल वेबसाइट rbi.org.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

लाइसेंस हो सकता है रद्द

अगर आपकी शिकायत सही पाई जाती है तो लोन देने वाली कंपनी के ऊपर जुर्माना लगाया जा सकता है। यहां तक कि कंपनी का लाइसेंस भी रद्द हो सकता है।

बेहतर होगा कंपनी से बात करें

अगर किसी कारण से आप किसी महीने लोन की EMI चुकाने में असमर्थ हैं या EMI बाउंस हो जाती है तो बेहतर होगा कि इस बारे में लोन देने वाली कंपनी से बात करें। अगर आपका बैंकिंग और सोशल रेकॉर्ड अच्छा है तो हो सकता है कि कंपनी आपको EMI चुकाने के लिए बिना पेनल्टी लगाए कुछ दिनों की मोहलत दे दे।

लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

-लोन से जुड़ा कोई भी डॉक्यूमेंट बिना पढ़े साइन न करें।
-रिकवरी से जुड़े पूरे नियम अच्छे से जान लें।
-पार्ट पेमंट से जुड़े नियम भी कर्ज देने वाली संस्था से अच्छे से मालूम कर लें। कई संस्थाएं समय से पहले कर्ज चुकाने पर कुछ चार्ज लेती हैं और कुछ बिलकुल नहीं।

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